यशश्वी प्रधान मंत्री मोदी:
शुद्ध अंतकरण सत्य सनातन सात्विक राजस योगी, मन से सन्यासी, तन पहरावा समय-स्तिथि अनुसार, स्वभिमानी, वाणी मीठी नम्रता भरपूर परन्तु दमदार असर वाली, छोटे घर, मेहनत-कश मां के निडर ईमानदार बेटे, आज़ाद भारत के
ही नहीं दुनिया के सर्वप्रिय नेता हैं आज हमारे यशश्वी प्रधान मंत्री मोदी जी। देश को भ्रष्टाचार मुकत बना कर मोदी हमें दे
रहे हैं आगे चोर-लुटेरों से बचाना हम जनता-जनार्दन का काम होगा। आप अकेले कुछ नहीं
कर सकते परन्तु वोट का अधिकार आप की शक्ति है। सोचिये और समझिएगा।
जय भारत विजय भारत।
इस देश के नाम बदलते गए हैं:
इस भू भाग के नाम कब और कैसे बदलते गए, जानिए। आर्यावर्त से भारत और फिर हिंदुस्तान और इंडिया और अब फिर भारत, ऐसे इस देश के नाम बदलते गए हैं।
हिमालय से कन्या कुमारी और पश्चिम में ईरान अफगानिस्तान से लेकर पूर्व में मियांमार से आगे के देशों तक यह एक देश आर्यावर्त होता था। यहाँ के प्रतिष्ठित लोगों को भी आर्या कह कर ही पुकारा जाता था।
एक समय आया जब महाराज दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र चक्रवर्ती सम्राट भरत का विजयरथ पूर्व-पश्चिम में दूर देशों तक अपनी ध्वजा फहरा चुका था। भरत की राज्य कुशलता और जनता-जनार्दन के प्रति उनकी कार्य-कुशलता ने उन्हें इतना लोक प्रिय बना दिया था कि लोगों ने देश को ही उनके नाम से पुकारना शुरू कर दिया था। इस तरह भरत का यह देश भारत नाम से प्रसिद्ध हुआ।
जब मध्य काल में तुर्क और ईरानी हिन्दुकुश पर्वत के उस पार से भारत में आए तो उन्होंने सिंधु घाटी से प्रवेश किया था। सिंधु एक संस्कृत नाम है जो इन की भाषा में नहीं था। इन विदेशियों ने सिंधु और सिंधु घाटी के इस ओर के प्रदेश को सिंधु की जगह हिंदुस्तान कहना शुरू कर दिया था। भारत के स्थानिक लोगों को हिंदू कहना शुरू कर दिया था। इस तरह से सिंधु का नाम हिंदू हो गया। उन्होंने यहां के निवासियों को हिंदू कहना शुरू कर दिया थाऔर इसी तरह हिंदुओं के इस देश को हिंदुस्तान का नाम भी मिल गया था।
फिर ब्रिटिशर्स का आगमन हुआ और इनकी भाषा अंग्रेजी है और इन्होने अपनी भाषा के अनुसार इण्डिया दे दिया था। अब आज़ाद भारत के ७६ वर्ष पूरे होने पर देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने G20 के सम्मेलन के समय देश का नाम फिर से "भारत" दे दिया है।
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