Sunday, 3 November 2024

   शोहरत और कमाई का सुंदर साधन --राजनीति 

पहले जो क्षत्रिय राजा होते थे वोह प्रजा के रक्षक और पालक बन कर प्रजा हित को देखते हुए राज्य करते थे। श्री राम और दुष्यंत और शकुंतला पुत्र भरत, जिसके नाम पर देश का नाम भारत हुआ, अच्छी राज्य व्यवस्था की उदाहरण हैं। आज भी भारत के लोग चाहते हैं कि देश में राम राज्य जैसी व्यवस्थाएं हों परन्तु अब बहुत कुछ बदल चुका है। अब तो रक्षक ही भक्षक बने हुए हैं। 

अब राजशाही नहीं, लोकतंत्र का समय है जिसमें कोई भी गधा घोड़ा राजनेता बन जाता है। देश हित की जगह पारिवारिक हित की सोच वाले लोग राज नेता बन, देश की कमान संभल  कर मन की इच्छा से संविधान बना कर समाज को बांटते आये हैं। यह क्रम नेहरू ने ही शुरू कर दिया था। कांग्रेस का यह क्रम अब तक चलता ही आ रहा है परन्तु अब तो प्रत्येक राज्य में। जे, पी, के आंदोलन के बाद उभरे नए राज नेता, लालू, मुलायम, करुणानिधि, बादल, अब्दुल्लाह, मुफ़्ती और कितने, प्रत्येक राज्य में, जिसको मौका मिला वोह समझ गया कि लूट का मौका राजा नीति जैसा और कहीं नहीं है। अनपढ़ गंवार, धन-दौलत के लालची, चोर-गुंडे, डाकू-लुटेरे, कातिल और बदमाश आदि सब के लिए, राजनीति करने और राजनेता बन कर, राज्य के लोगों की सेवा करने की, ना भाई ना, खजाने लूटने भरने की  और प्रशासन पर भी प्रशासक बनने की सहूलत इस देश में प्राप्त है। बोलो इस में बुरा क्या है ? कमाने खाने के लिए सभी कुछ ना कुछ करते ही हैं।

 यह भी तो एक साधन है। सब से अच्छा-है ना ?            

No comments:

Post a Comment