इस
देश की सनातन
धरम पद्धति तथा सामाजिक संस्कृति
पुरातन ऋषियों की अथक तपस्या
की देन है |आज
के युग के वैज्ञानिक
मूल्यों पर भी यह
सही उतर रही है
| किन्तु आज का हमारा
यह देश अपनी बहुमूल्य
संपत्ति जो एक अति
उत्तम संस्कृति और बहुत ही
व्यवहारिक सामाजिक रीती रिवाज़ों और
सनातन धार्मिक पद्धतियों पर आधारित थी
उसको लगभग खो ही
चुका है | पिछले हज़ारों
सालों में भी जो
हमने नहीं खोया था
वह आज़ादी के बाद हुए
राजनीतिक व सामाजिक परिवर्तनों
की भेंट चढ़ चुका
है |
कहावत
है कि "यथा राजा तथा
प्रजा" | हर देश के
शाशक किसी न किसी
धरम को मान्यता देते
हैं जैसे यूरोपियन
देश क्रिस्चन हैं और ईसा
मसीह को अपना भगवान
मानते हैं और मुस्लिम
देशों का मान्य उनके
पैगम्बर मुहम्मद हैं I
किन्तु इस देश की
धरम मान्यता आज़ादी के पश्चात् "सेक्युलरिस्म"
के नाम से जानी
जाने लगी | नेहरू देश के प्रधान
मंत्री बने | आज़ादी की लड़ाई में
क़ुरबानी तो बहुत दे
गए थे किन्तु गाँधी
हर बात नेहरू की
सुनते थे ? शुभाष चन्दर,
सावरकर और
भगत सिंह जैसे हज़ारों
वांकरे वीरों की कुर्वानिओं को
भुला ही नहीं दिया
गया बल्कि अंग्रेजी हकूमत के तौर तरीकों
पर चलते हुए ऐसे
सभी को बागीओं की
गिनती में रख दिया
गया था | गाँधी जी
को महात्मा का और देश
पिता का दर्ज़ा भी
दिया गया है I क्या
इस के पीछे कांग्रेस
पार्टी अथवा नेहरू की
वोट बैंक पॉलीसी नहीं
रही? आज़ादी के पहले कांग्रेस
और मुस्लिम लीग देशभर में
दो ही मान्य पार्टी
थीं | कांग्रेस और गाँधी का
नाम हर हिन्दू की
जवान पर था | क्योंकि
मुस्लिम लीग ने इसको
हिन्दुओं की पार्टी घोषित
कर रखा था और
हर हिन्दू की वोट भी
इनके लिए ही थी
| गाँधी
तो सभी देशवासियों को
देशवासी ही समझते थे,
हिन्दू हो या मुस्लिम
| किन्तु
"जिन्हा" की मुस्लिम लीग
ने मुस्लिमों को अलग धरम
के नाम पर बाँटने
का काम किया और
मुस्लिमों के नाम पर
अलग देश की मांग
कर दी I देश के
तीन टुकड़े कर दिए गए
और इस दौरान मुस्लिम
अत्याचार हर हद्द पार
गया था | मुस्लिम-अधिक
बस्तियों व इलाकों में
हिन्दू परिवारों को सरेयाम कतलियाम
का भोग ही नहीं
बनना पड़ा, बहु-बेटीओं
की बेइज्जती आँखों के सामने देखने
के लिए मजबूर भी
होना पड़ता था I कुरान
पढ़ने और "अल्लाह" का नाम लेने
वाले और धरम के
नाम पर देश का
वँटवारा करने वाले इंसानियत
को भूल कर दानव
वन हिन्दू
परिवारों पर जुरम करने
और उनको लूट लेने
को ही अपना धरम
समझते थे और यही
इस कौम के धरम
गुरुओं की हिदायत
भी रहती है I यह
लोग ऐसे कुकरम को
ज़िहाद का नाम देते
हैं | क्यों कि सनातनी जिन्हें
हिन्दू नाम दिया गया
है और जो मूर्ति
पूजा करते हैं उनको
यह लोग काफिर कहते
हैं और उनको धरम
परिवर्तन करने पर मज़बूर
करना या फिर ख़तम
कर देना, एक हिदायत रहती
है और जो आज
भी है I रहता है
तो मौके का इंतज़ार,
क्यों कि काफरों को
मारने से या धरम
परिवर्तन करवाने से जन्नत नसीब
होती है, ऐसे भरोसे
में मुस्लिम समाज को रखा
गया है | कश्मीर में
अब तक लाखों लोगों
पर "जिहाद" के नाम पर
पिछले तीन दशकों से
बर्बरता और आतंक का
नंगा नाच होता रहा
है | जम्मू कश्मीर के अब्दुल्ला और
मुफ़्ती तो इसमें पाकिस्तान
से आते आतंकवादियों के
और अलग-वादिओं के
अंदुरुनी तौर पर सहायक
थे ही किन्तु दुःख
तो इस बात का
है दिल्ली में भी सरकारें
कश्मीरी ब्राह्मणो के ऊपर होते
जुर्मों को मूक दर्शक
हो देखती रहीं |
दुनिया
भर में सनातन संस्कारों
और पूजा पद्धति को
मानने वाले भारत और
नैपाल, दो ही देश
रह गए थे | कांग्रेस
और नेहरू नीति ने सनातन
धर्मियों का यह हक्क
हमेशा के लिया छीन
लिया है और आने
वाले समय में लगता
नहीं कि कोई ऐसा
आंदोलन उठ सकेगा जो
भारत को अपनी पहचान
वापस दिला पायेगा | मुस्लिम
संख्या इस देश में
दिन दूनी और रात
चौगुनी बढ़ रही है
| यदि हिन्दू ऐसे ही अपने
आप में मस्त शांत
रह सोए रहे तो
वह दिन बहुत दूर
नहीं होगा जब हिन्दोस्तान
भी इस्लामिक देश घोषित हो
जाएगा और हमारी आनेवाली
पीढ़ीयों को इस्लाम ही
स्वीकार करना पड़ेगा और
जो नहीं मानेंगे उनको
बर्बरता को सहन करते
अंत में मरना ही
पड़ेगा | देश की सरकार,
न्याय विदों और हिन्दुओं को
बहुत शीघ्र ही नहीं तुरंत
जागने की सख्त जरुरत
है | एक देश में
सभी के लिए एक
सामान्य कानून लागू होना चाहिए
| कानून को धरम के
साथ जोड़ना इस देश के
हिन्दुओं के लिए घातक
ही सिद्ध हुआ है और
मुस्लिम मुल्लाओं के हौसले बुलंद
हो गए हैं | येह
लोग कहते हैं कि
इनके पैगम्बर मुहम्मद ने चार शादियां
की थीं और इसलिए
इस्लाम में चार शादी
या अधिक भी कर
सकते हैं | किसी मुस्लिम ने
कभी अपनी बहन या
मां पर होते रहे
अन्याय के बारे में
भी कभी सोचने की
हिम्मत की है? किसी
औरत से भी इस
रिवायत के बारे में
जानने की कोशिश की
गई होती ? औरत को इस्लाम
के मुल्ला-काज़िओं ने मर्दों के
भोग-शौक की एक
बिना सोच-समझ वाली
चीज़ {वस्तु} बना रखा है
और येह सभ गरीब
घर की लड़कियों पर
ही लागू होता मिलेगा
| कोई पढ़ी लिखी लड़की
येह बर्दाश्त नहीं करेगी |
एक दूसरी बात यह कि
पैगम्बर की उदाहरण देते
हैं जबकि हमारे यहाँ
तो श्री कृष्ण ने
तो १६००८ से शादी रचाई
थी | उनके पिता वासुदेव
जी के भी एक
से अधिक पत्नियां थी
| हिन्दू राजा भी एक
से अधिक पत्नियां रखते
ही आये हैं | हिन्दू
परिवारों में भी दर्ज़न-दर्ज़न बच्चे होते थे किन्तु
जब तक अनपढ़ता और
अज्ञानता रही | आज हर कोई
परिवार दो बच्चों तक
सीमित हो कर रह
गया है | और दूसरी
ओर मुस्लिम वोट बैंक अय्याश
और गरीब अनपढ़ मुस्लिम
परिवारों की बदौलत बढ़ता
ही जा रहा है
क्यों कि उनको कानूनी
पाबन्दी नहीं है बल्कि
सरकार की सहायता उन
को ज़रूर उपलभद रहती
है और अब तो
मोदी सरकार के आने पर
उनके लिए और सुभिदाएँ
बढ़ गई हैं |
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